
सीखने की कोई उम्र नहीं होती
हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले की रहने वाली 63 वर्षीय सुशीला देवी ने यह साबित कर दिया है कि अगर मन में कुछ करने का जज़्बा हो, तो उम्र कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती। उन्होंने 10वीं की परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर न केवल अपना वर्षों पुराना सपना पूरा किया, बल्कि समाज को भी एक सकारात्मक संदेश दिया है।
बचपन में छूट गई थी पढ़ाई
सुशीला देवी की पढ़ाई आर्थिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण बचपन में ही रुक गई थी। कम उम्र में विवाह होने और परिवार की जिम्मेदारियों के चलते वे अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर सकीं। हालांकि उनके मन में पढ़ने और आगे बढ़ने की इच्छा हमेशा बनी रही।
समय के साथ जब परिस्थितियाँ अनुकूल हुईं, तब उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू करने का निर्णय लिया। परिवार के सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने 10वीं की परीक्षा की तैयारी की।
मेहनत से मिली सफलता
नियमित अध्ययन, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ सुशीला देवी ने परीक्षा दी और सफलता हासिल की। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे महेंद्रगढ़ जिले का नाम रोशन किया। उनकी कहानी आज उन लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो किसी कारणवश अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं।
परिवार का मिला पूरा साथ
सुशीला देवी का कहना है कि उनके परिवार ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। घर के कामकाज के साथ पढ़ाई करना आसान नहीं था, लेकिन परिवार के सहयोग और अपने मजबूत इरादों की बदौलत उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।
समाज के लिए प्रेरणा
आज सुशीला देवी की सफलता यह संदेश देती है कि शिक्षा केवल युवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि हर उम्र के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। यदि इच्छा शक्ति मजबूत हो, तो किसी भी उम्र में नई शुरुआत की जा सकती है। उनकी कहानी विशेष रूप से महिलाओं को अपने अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करती है।












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